मातेश्वरी एकता सशक्तिकरण के 9 प्रेरणादायक नियम
(महिलाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु)
1. आत्मसम्मान और संस्कार – हमारी पहचान
हर महिला और बच्चा अपने आत्मसम्मान को सर्वोपरि रखे तथा भारतीय संस्कृति, परंपरा और मातृशक्ति के आदर्शों का पालन करे।
संस्कारयुक्त जीवन ही सशक्त समाज की नींव है।
2. शिक्षा और कौशल – सशक्त भविष्य की कुंजी
ज्ञान ही सबसे बड़ा धन है। संगठन प्रत्येक महिला और बच्चे को शिक्षा, स्वावलंबन और कौशल विकास के लिए प्रेरित करेगा,
ताकि वे आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बन सकें।
3. एकता, सहयोग और सद्भाव – हमारी शक्ति
हम सब एक परिवार हैं। संगठन में सभी सदस्य प्रेम, सहयोग और आपसी सम्मान की भावना से कार्य करेंगे।
प्रतिस्पर्धा नहीं, परस्पर सहयोग ही हमारी सच्ची प्रगति का मार्ग है।
4. समाज सेवा – हमारा धर्म, हमारा कर्म
जरूरतमंदों, असहायों, विधवाओं, अनाथ बच्चों तथा वृद्धजनों की सेवा में संगठन सदैव तत्पर रहेगा।
सेवा ही सच्ची पूजा है।
5. संस्कारवान बच्चे – उज्ज्वल कल का आधार
हर माता अपने बच्चों में अच्छे संस्कार, अनुशासन, सत्य और करुणा के मूल्य रोपित करे।
क्योंकि संस्कारवान बालक ही भविष्य के सशक्त नागरिक बनते हैं।
6. स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा – हमारी प्राथमिकता
संगठन का प्रत्येक सदस्य अपने स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा के प्रति सजग रहेगा।
स्वस्थ तन और स्वच्छ मन से ही जीवन में सच्ची प्रगति संभव है।
7. नारी सम्मान – राष्ट्र सम्मान
किसी भी नारी या बालिका के सम्मान पर कोई आंच न आने पाए — यह हर सदस्य का संकल्प है।
नारी के सम्मान में ही राष्ट्र की गरिमा बसती है।
8. अनुशासन और मर्यादा – संगठन की शक्ति
हर सदस्य संगठन के नियमों, मर्यादाओं और उद्देश्यों का पालन दृढ़ता और निष्ठा से करेगा।
अनुशासन से ही संगठन में एकता और शक्ति बनी रहती है।
9. भक्ति, सेवा और नारीशक्ति – हमारा पथ और प्रण
“मातेश्वरी एकता सशक्तिकरण” का प्रत्येक कार्य भक्ति भावना, सेवा दृष्टि और नारीशक्ति की प्रेरणा से सम्पन्न होगा।
हमारा मंत्र
“सेवा ही साधना है, और नारी ही शक्ति है।”
जय माता दी, जय नारीशक्ति, जय भारत माता!